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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

            *१०५*

*मृत्यु सच्चे प्रेमियों के लिये स्वागत की वस्तु होती है।*

          मृत्यु का नियन्त्रण करने वाले श्रीभगवान् हैं, जो किसी का कभी भी अमंगल नहीं करते। उनकी भेजी हुई मृत्यु हमें अमंगल दीखती है, किंतु उसकी आड़ में हमारा कितना मंगल है--इसकी कल्पना हम नहीं कर सकते। हाँ, यदि हम चाहें तो हम स्वयं मृत्यु का आनन्द ले सकते हैं। जो मृत्यु जगत के लिये अत्यन्त भयानक है, वही सच्चे प्रेमियों के लिये, प्रभु के प्रियजनों के लिये अत्यन्त स्वागत की वस्तु होती है, क्योंकि मृत्यु उन्हें अपने प्रियतम प्रभु के अत्यन्त निकट पहुँचा देती है। अवश्य ही कहना-सुनना बड़ा आसान है, वास्तविक मृत्युको इस रूप में स्वीकार करना थोड़ा कठिन है। किंतु भगवान की कृपा से असम्भव कुछ भी नहीं--यह बात भी भूलनी नहीं चाहिये।

अन्तिम बात यही है--हम सब लोग भजन करें।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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