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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

          *१११*

*अपने आपको सर्वथा उन पर छोड़ दीजिए*

          भगवान क्या, कब, कैसे करते हैं--इसे कोई नहीं जानता। वे क्या हैं, इस बात को वस्तुतः वे ही जानते हैं। पर आजतक जितने ऊँचे-ऊँचे सन्त हो गये हैं और हैं, उन्होंने अनुभव किया कि वे हैं और जो कुछ करते हैं, वही ठीक है; उसी में प्रत्येक जीवन का अनन्त मंगल है। उनसे कुछ भी न चाहकर अपने आपको सर्वथा उन पर छोड़ देना चाहिये। अतः आप भी अपने आपको सर्वथा उन पर छोड़ दीजिये। अपनी ओर से केवल इतनी चेष्टा करें कि जीभ के द्वारा निरन्तर नाम-जप हो ; उसी में आनन्द मानिये। इतनी बात अवश्य देख लें कि अपनी ओर से सारी शक्ति लगा दी जाय।

*परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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