116
*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
*११६*
*कम-से-कम बोलकर काम चलायें और शेष समय मशीन की तरह भगवान का नाम लें*
श्रीसीताजी की अवस्था का वर्णन करते हुए हनुमान जी महाराज कहते हैं--
*नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट ।*
*लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।।* (मानस ५/ ३०)
'रात-दिन नाम का पहरा लगा हुआ है, ध्यान के किवाड़ बंद हैं एवं अपने ही चरणों में नेत्रों का लगा रहनारूप ताला बंद है, इसीलिये श्रीसीताजी के प्राण नहीं निकल पा रहे हैं।'
यह गोस्वामी तुलसीदासजी की कोरी कल्पना नहीं है, श्रीरामजी के विरहमें श्रीसीताजी की वास्तविक अवस्था का वर्णन है। श्रीभगवा्न ने अपनी हाल्दिनी शक्ति के द्वारा यह आदर्श स्थापित करवाया कि हमसे बिछडे भक्त की यही दशा होनी चाहिये। आप भी प्रभु से बिछुड हुए हैं, अतः आप भी इस दशा को प्राप्त करने की सुन्दरतम अभिलाषा को लेकर नाम का पहरा लगा दीजिये। कंजूस के ध्यान की तरह वाणी का संयम कीजिये। अनावश्यक बिल्कुल मत बोलिये। काम के लिये बोलते समय भी यह ध्यान रहे कि कम-से-कम बोलकर काम चलाया जाय और शेष समय मशीन की तरह नाम लें। आप अध्यापक हैं, आप विद्यालय जाइये, पर कक्षा में पढ़ाते समय ध्यान रखिये कि जिस समय चुप रहने का अवसर हो, उस समय नाम लेने लगे। लज्जा छोड़ दीजिए। वहाँ के लोग ढोंगी कहेंगे अथवा प्रशंसा करेंगे, इस विचार को छोड़ दीजिए। दृढ़ता से उद्देश्य स्थिर करके प्रभु के चरणों को पकड़िए। इसी में जीवन की सार्थकता है। जिस सुन्दर भाव को लेकर आप साधना में प्रवृत्त हुए हैं, जैसा सुन्दर मधुर सम्बन्ध आपने प्रभु के साथ स्थापित किया है, उसे एक क्षण के लिए भी कलुषित और ढीला मत कीजिये। अब इस सम्बन्ध को निभाने के लिए ही जीना ओर मरना है।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
Comments
Post a Comment