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*आस्तिकताकी आधार-शिलाएँ*

                *११९*

*निराश न होकर भगवान की ओर बढ़ चले*

            बिल्कुल निराश न होकर श्रीभगवान की ओर बढ़ चले। सचमुच बढने की इच्छा रखने वाले को प्रभु बुला लेते हैं। जगत के किसी हेर-फेर से चकित होने की आवश्यकता नहीं। जो कुछ होता है, भगवान् का रचा हुआ होता है। आपके न चाहने पर भी पर भी वह होकर ही रहेगा। उसे कोई टाल नहीं सकता। इसलिये यहाँ से अपनी दृष्टि सर्वथा मोड़ लेनी चाहिये और अधिक-से-अधिक भगवान् का चिन्तन करना चाहिये। अन्यथा इस जगत को देखकर कभी हँसना और कभी रोना पड़ेगा ही।

          एक बात और है। जहाँ तक हो, प्रपञ्च के काम में कम पड़ियेगा ; नहीं तो भगवान् गौण हो जायँगे और प्रपञ्च मुख्य।

         भगवान्का नाम यदि नहीं भूले तो सब ठीक हो जायगा। यही सबसे मुख्य बात है।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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