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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

            *१२४*

*अपने भविष्य को सदा निर्मल देखो*

            सन्तों के वचन हैं-'मालिक हैं साहिब सीताराम, सोच मन काहे को करे।' बस निश्चिन्त रहिये। एक बहुत ऊँचे महात्मा ने कहा है--'अपने भविष्य को निर्मल देखो। सोचो कि प्रभु तुम्हें अवश्य मिलेंगे, चाहे तुम कितने ही अधम क्यों न होओ।' हम लोग भी ऐसे ही सोचें। सचमुच अपना भविष्य मलिन सोचना भगवान की अपार दया का अपमान करना है।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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