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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*भगवान के समर्पित वस्तु का महत्व*
जो व्यक्ति भगवान के चरणों मे समर्पित हो जाता है, उसकी दृष्टि में अपने केवल भगवान ही होते हैं एवं जो कुछ भी बचा रहता है, वह भगवान का ही होता है। उस अवस्था में उसके लिए मेरी माँ, मेरे बाप, मेरे भाई कुछ भी नहीं रहते। परन्तु जो व्यक्ति अपने आपको उससे (भगवान के समर्पित व्यक्ति से) सम्बन्ध मानता है, वह बड़ा भाग्यवान है ; क्योंकि भगवान को समर्पित हुई वस्तु से सम्बन्ध रखने वाली वस्तु भी स्वाभाविक ही भगवान को समर्पित हो जाती है और उस पर भगवान का विशेष अधिकार होता है। अवश्य यह बात तभी लागू पड़ेगी, जब कोई व्यक्ति अपने आपको हृदय से उससे (भगवान के समर्पित भक्त से) सम्बन्ध बनाता है।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जु ।।*
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