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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

             *१३१*

*आप अपना भवन बुहारिये*

             सनातन आचार का पालन करते हुए ही आप प्रिया–प्रियतम का अखण्ड स्मरण कीजिये। दूसरे बनते हैं या बिगड़ते हैं, इसका ठेका आपको श्रीकृष्णने दिया हो तो फिर तो उनकी सँभाल करनी चाहिये ; पर यदि ठेका नहीं दिया है तो यह दोहा याद कीजिये--

तेरे भाऐं जो करौ, भलौ–बुरौ संसार।।
‘नारायन' तू बैठि कै, अपनौ भवन बुहार।।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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