132
*आस्तिकता की आधारशिलाएँ*
*१३२*
*आप चाहें तो निश्चिन्त हो सकते हैं*
खूब नाम लीजिये तथा भगवान की कृपा का दर्शन प्रत्येक परिस्थिति में कीजिये। भगवत्कृपा एवं नामजप आश्रय लेकर निश्चिन्त हो जाइये। आप चाहें तो निश्चिन्त हो सकते हैं ; आपके चाहने भर की देर है। आपने चाहा तो नाम के रूप में भगवान् बिना किसी परिश्रम के ही जीभ पर नाचने लगेंगे, उनकी कृपा का प्रवाह बह जायगा। स्वयं निहाल हो जायँगे तथा बहुतों को निहाल करेंगे।
नाम अधिक-से-अधिक जपिये, इतनी प्रार्थना है। श्रीकृष्ण बड़े दयालु हैं, लेकिन परीक्षा भी अवश्य करते हैं। साथ ही उनके दरबार से कोई निराश नहीं लौटता, यह बात भी भूलनी नहीं चाहिये।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
Comments
Post a Comment