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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

            *१३४*

*भगवच्चिन्तनकी चेष्टा कीजिये, सफलता मिलेगी।*

          खूब मौज से श्रीकृष्ण का निरन्तर चिन्तन कीजिये। सब काम एक तरफ तथा भगवच्चिन्तन एक तरफ। मन से निश्चय करके चिन्तन की चेष्टा कीजिये, तब चिन्तन में सफलता मिलेगी। अन्यथा जब तक भगवान के चिन्तन के समान कोई भी दूसरा काम लाभकारी दीखेगा, तबतक मन भगवान को छोड़कर उस काम की ओर ही झुकेगा ; क्योंकि अनादिकाल से अन्य-अन्य विषयों में ही मन को स्वाद मिलता रहा है, भगवच्चिन्तनका स्वाद उसे ठीक से कभी नहीं मिला। मिला होता तो फिर तो भगवच्चिन्तन के सिवा दूसरा काम मनसे होता ही नहीं।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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