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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*भगवान का प्रत्येक विधान कृपा से ही भरा होता है*
जीवन में एक बात कर लेने पर सारा दुःख मिट सकता है। वह बात है--भगवान् की कृपालुता पर विश्वास कर लेना। सच मानिये--जैसे सूर्य में अन्धकार देने की शक्ति नहीं, वैसे ही--विनोद की भाषा में यह कहा जा सकता है कि भगवान् में किसी का अमंगल करने की शक्ति नहीं है। उनका प्रत्येक विधान कृपा से ही भरा होता है, चाहे उसका स्वरूप बाहर से कितना भी भीषण क्यों न हो ! इसलिये आप किसी भी परिस्थिति से घबरायें नहीं। शरीर बीमार हो रहा है, यह बात बाहर से बड़ी दुःखद प्रतीत होती होगी ; किंतु इस बीमारी के पर्दे में प्रभु का कितना मंगलमय विधान काम कर रहा है--इसकी कल्पना भी आपको अथवा किसी को होनी कठिन है। इसके अतिरिक्त शरीर को जिस दिन जाना होगा, उस दिन लाख प्रयत्न करने पर भी चला ही जायगा और उस निश्चित तिथि के पहले यह कभी जायगा भी नहीं। इसलिये शरीर के जाने की चिन्ता तो सर्वथा छोड़ देनी चाहिये, बल्कि आप बराबर यह भावना करें--भगवान का जो विधान होगा, वह मंगल के लिये होगा ; उनके हाथ में मेरा जीवन समर्पित है, फिर मुझे क्या चाहिये।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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