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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*शरीर को भजन का साधन बनाने के लिये उसपर ध्यान रखना चाहिये*
जीवन की सफलता तो इसमें है कि मन असत् शरीर आदि के चिन्तन छोड़कर एकमात्र प्रिया-प्रियतम का ही चिन्तन करे, पर जब तक ऐसा नहीं हो जाता तब तक असत् शरीर आदि को भी भजन का साधन बनाने के लिये उसकी ओर कुछ-कुछ ध्यान रखना ही चाहिये। इसीलिये मैं चाहता हूँ कि सत्संग में रहने पर भी आपको अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना चाहिये ; क्योंकि जब तक शरीर में मोह है, तब तक हठ से की हुई स्वास्थ्य की उपेक्षा कभी-कभी भले सफल हो जाय, अधिकांश में पीछे बहुत ही तंग करने लगती है एवं पश्चात्ताप का भी कारण बन जाती है।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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