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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

             *१४८*

 *खूब तेजी से भगवान की ओर बढिये*

           जीवन तो समाप्त होगा ही, चाहे विषयों के सँग में बीते अथवा भगवान के सँग में। भगवान की ओर जितना बढियेगा, उतनी शान्ति बढ़ेगी। उनको छोड़कर जगत के किसी भी प्रपञ्च में सुख खोजियेगा, जलन बढ़ेगी। आज तक जितने सन्त हुए हैं, वे सब-के-सब यही कह गए हैं। जीवन का भरोसा नहीं है, अतएव खूब तेजी से भगवान की ओर बढिये। अवश्य ही घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान की पूर्ण कृपा आपके साथ है।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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