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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
*१४९*
*साधन की कसौटी*
प्रियाप्रियतम की स्मृति कैसी और कितनी होती है--सारी साधना की कसौटी इसी में है। यदि उनका विस्मरण हो तो समझना चाहिए कि पथ उल्टा है, चाहे वह पथ कितना भी सुन्दर क्यों न दीखे ; तथा यदि उनकी स्मृति बढ़ रही है तो पथ कितना भी कँटीला क्यों न दीखे समझना चाहिये, यही साधा पथ है।
बस, निरन्तर नाम लीजिये ; और कुछ भी नहीं करना है, सब भगवान करेंगे।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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