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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

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*एकमात्र श्रीकृष्ण की कृपा ही मनुष्य की रक्षा करती है।*

           देखें, मैं जब अपने जीवन को देखता हूँ तो यह बात बिल्कुल स्पष्ट दीखती है कि मैं पग-पग पर फिसलता रहा हूँ और श्रीराधाकृष्ण मुझे पग-पग पर सँभालते रहे हैं। यदि वे न सँभालते तो न जाने जीवन किधर बह जाता। यदि श्रीराधाकृष्ण ने मुझे बचाया-सँभाला है तो किसी को मैं क्या बचाऊँगा ? बचाने वाले-सँभालने वाले वे एक हैं। जगत में माया से पार हो जाना सचमुच बड़ा ही कठिन है। मेरी तो ऐसी ही दृढ़ धारणा है कि जिसे श्रीराधाकृष्ण निकालेंगे, वही माया से निकल सकता है ; अपना पुरुषार्थ तनिक भी काम नहीं दे सकता। जिस समय विषयों का प्रलोभन आता है सारा विवेक निष्फल हो जाता है। एकमात्र श्रीकृष्ण की कृपा ही मनुष्य की रक्षा करती है। इसलिये हम लोगों को चाहिये कि चिन्ता बिल्कुल छोड़ दें। जिस दिन श्रीराधाकृष्ण चाहेंगे, उस दिन ही मनुष्य विषयों से मुख मोड़ सकता है। एक बात और है--जिसने श्रीकृष्ण की शरण ली है, किसी-न-किसी दिन श्रीकृष्ण उसका अवश्य उद्धार करेंगे ही।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू।।*

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