153
*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
*१५३*
*और क्या चाहिए ?*
आप सत्संग से पूरा-पूरा लाभ उठाने की चेष्ठा कर रहे हैं, सो अच्छी बात है। आपको अब करना ही क्या है ? भजन और सत्संग में ही तो शेष जीवन बिता देना है। फिर उसमें उत्साह की कमी तो आनी ही नहीं चाहिए। सन्तों का सँग हो, नाम-जप हो तथा भगवान के रूप की झाँकी होती रहे, बस, और क्या चाहिये ?
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
Comments
Post a Comment