156
*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
*१५६*
*वे आपकी भी सुन सकते हैं, यदि आप उन्हें सुनाना चाहें*
यदि सच्ची चाह हो तो भगवान की दया से निरन्तर नामजप होना खूब आसानी से सम्भव है। इसलिये आप मन से श्रीकृष्ण के आगे अपनी चाह प्रकट कीजिये, फिर देखिये भजन अवश्य होगा। मन में कुछ रखकर ही प्रायः लोग प्रार्थना करते हैं ; इसलिये भगवान् भी देखते हैं--'अभी ठीक चाह नहीं, चलो, अभी टाल दें। यदि हृदय की सारी शक्ति से भगवान् के सामने एक बार भी रोने लगे तो फिर भगवान् उसी क्षण असम्भव को भी सम्भव कर देते हैं। इसलिये आपसे भी प्रेमपूर्वक प्रार्थना है कि निरन्तर नामजप की चाह लेकर आप श्रीकृष्ण के सामने रोज नियमित रूपसे प्रार्थना करें। जिस दिन प्रार्थना हृदय से होगी, उसी क्षण से भजन होने लगेगा। श्रीकृष्ण पर भरोसा करके मन से उनको कहिये-लिखिये। वे सबकी सुनते हैं और आपकी भी सुन सकते हैं, यदि आप उन्हें सुनना चाहें।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
Comments
Post a Comment