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*आस्तिकता की -शिलाएँ*

          *१५७*

*खूब तेजी से भगवानकी ओर बढिये*

                 जीवन तो समाप्त होगा ही, चाहे विषयों के संग बीते अथवा भगवान के संग। भगवान की ओर जातना बढियेगा, उतनी शान्ति बढेगी। उनको छोडकर जगत के किसी भी प्रपञ्च में सुख खोजियेगा, जलन बढेगी। आज तक जितने संत हुए हैं, सब-के-सब यही कह गये हैं। जीवन का भरोसा नहीं है, अतएव खूब तेजी से भगवान् की ओर बढिये। अवश्य ही घबराने की जरूरत नहीं है। भगवान् की पूर्ण कृपा आपके साथ है।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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