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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*प्रभु से एक बार जुड़ना ही जीवन का सारा इतिहास बदल जाने का शुभ शकुन है*
जिस क्षण किसी भी प्राणी ने एक बार भी किसी भी निमित्त से झूठ-मूठ ही प्रभु से एक बार सम्बन्ध जोड़ लिया, उस क्षण ही सचमुच-सचमुच-सचमुच अनादि अनन्कालीन जीवन भूमिका की एक नई रूपरेखा निर्मित हो गई। अर्थात अब आगे चलकर अवश्य,अवश्य,अवश्य उस शिशु की भाँति प्रभु के चिद् विलास के रहस्य को जान जाएगा, जो प्रभु के अन्त में नित्य विराजित रहकर, उनके चिद् विलास का नित्य-निरन्तर अनुभव करता हुआ परमानन्द में निमग्न रहता है।
प्रभु से एक बार जुड़ना ही जीवन का सारा इतिहास बदल जाने का मानो सचमुच सत्य परम मंगलमय शुभ शकुन है। अतएव हमने चाहे किसी भी निमित्त से श्रीकृष्ण को यदि एक बार पकड़ लिया है तो हमारे भावी जीवन की योजना भी बन ही गई। परिस्थितियों में उल्ट-फेर तो हमारे विश्वास की कमी के कारण होता रहता है। यदि विश्वास पूर्ण होता, तो बात में एक बात होकर ही रहती या तो परिस्थिति का हमारे अभिलाषित ढंग से समाधान हो जाता अथवा हमारे मन से परिस्थिति की वासना निकल कर हमें शान्ति मिल जाती। परन्तु विश्वास की कमी के कारण उल्ट-फेर का सामना करना पड़ रहा है; किन्तु यह होते हुए भी वह बात तो सर्वथा सर्वांश में अक्षुण्ण रहेगी ही जो श्रीकृष्ण से जोड़ने का अवश्यम्भावी परिणाम है कि हम उनके चिद् विलास का अनुभव कर के ही रहेंगे।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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