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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

                *३६*

*दृढ़ विश्वास के साथ भगवान को पुकारिये नाम का जप कीजिए और कभी झूठ ना बोलिए*

       १- भगवान का जो भी सम्बन्ध एक बहुत बड़े संत से है, वही सम्बन्ध उनका हमसे भी है।  यदि हम प्रेम से, दृढ़ विश्वास के साथ होने पुकारेगें तो वह लोक एवं परलोक--दोनों जगह ही वह बिल्कुल खुले हाथ से हमारी सहायता कर सकते हैं और एक बार भी यदि हमारी उनसे ठीक-ठाक जान-पहचान हो गई तो सदा के लिए हमारे सभी दु:ख सर्वथा मिट जायँगे। अतः दृढ़ विश्वास के साथ उन्हें पुकारिये। जब समय मिले, तब मन-ही-मन उन्हें पुकारिये।

      २- अन्तःकरण मलिन होने के कारण, भगवान की पूर्ण कृपा हम पर होने पर भी हम कृपा को अनुभव नहीं कर रहे हैं। अतः एक काम अवश्य करना चाहिए काम भर बोलने के बाद जीभ से निरन्तर भगवान का जो नाम प्यारा लगे, उसका उच्चारण करते रहना चाहिए। इससे पहले नियम की आवश्यकता होती है। इसलिए हम अपने पास एक माला रखें और फिर यह नियम करें कि "सोने से पहले एक लाख नाम का जप अवश्य कर लूँगा।" एक लाख नियम लेने में यदि कुछ अड़चन प्रतीत हो तो पचास का नियम ले लें।

     ३- सावधानी से यह चेष्टा करें कि मजाक में कभी भी झूठ बात नहीं बोली जाय।

 *।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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