4

*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

            *४*

*भगवान से एक बार जुड़ना ही जीवन का सारा इतिहास बदल जाने का शुभ शकुन है*

   बहुत पढ़े-लिखे होने के कारण कोई विश्वास चाहे न करें, परन्तु सत्य तो सत्य ही रहेगा। भगवान हैं और रहेंगे। उनका अनन्त अपरिसीम आनन्दमय चिद्विलास अनादिकाल से चलता रहा है, अनन्तकाल तक चलता रहेगा। उस चिद्विलास मे ही विश्व का प्रत्येक प्राणी जाने या अनजाने में सम्मिलित है। समुद्र की लहर की तरह बन-बनकर वह उठता है और उसी में विलीन हो जाता है अर्थात भगवान के परम आनन्दमय अंक में ही विराजित था, है और रहेगा। उस अंक में ही उसकी सम्पूर्ण चेष्ठा हो रही है। कल्पना करो, गर्भ में जब कोई बच्चा रहता है, तो पाँचवे-छठे महीने के बाद उसके गर्भ में चलने की अनुभूति माँ को होने लगती है। उसका हिलना-डुलना चाहे कैसा भी हो , माँ में आनन्द का संचार करता है। माँ उस गर्भस्थ सन्तान के सम्बंध में यह विचार नहीं करती कि यह तो हमारा तिरस्कार करता है। वैसे ही प्रत्येक भूत-प्राणी भगवान के गर्भ में निवास कर रहा है। भगवान के संकल्प में ही उसकी सम्पूर्ण चेष्ठाएँ हो रही हैं और उस प्राणी के अनजाने में ही भगवान के चिद्विलास का प्रवाह बड़े व्यवस्थित ढंग से निरन्तर चल रहा है और अनन्तकाल तक चलता रहेगा ; किंतु जो प्राणी इसको जान लेता है, उसे एक अनिर्वचनीय अचिन्त्य आनन्द का अनुभव होता है। वास्तव में यह जानना और न जानना भी भगवान के सच्चिदानन्दमय विलास का ही एक अंग है। सरल भाषा मे इसे यों समझना चाहिए--जिस क्षण किसी प्राणी ने एक बार भी किसी भी निमित से झूठ-मूठ ही भगवान से सम्बन्ध जोड़ लिया, उस क्षण ही सचमुच अनादि अनन्तकालीन जीवन-भूमिका की एक नई रूपरेखा निर्मित हो गयी। अर्थात अब आगे चलकर वह अवश्य-अवश्य उस प्राणी की भाँति भगवान के चिद्विलास के रहस्य को जान जाएगा, जो भगवान के अंक में नित्य विराजित रहकर, भगवान के विलास का नित्य-निरन्तर अनुभव करता हुआ परमानन्द में निमग्न रहता है। भगवान से एक बार जुड़ना ही जीवन का सारा इतिहास बदल जाने को मानो सचमुच सत्य, परम् मंगलमय शकुन है।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जु ।।*

Comments

Popular posts from this blog

92

90

157