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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*दो ही उपाय*
दो ही उपाय हैं -- (१) -- जिस प्रकार मशीन चलती है, उसी तरह यदि जीभ से जागने से लेकर सोने तक नाम का निरन्तर उच्चारण हो, तो इतनी शीघ्रता से भगवान के अस्तित्व में विश्वास होगा कि स्वयं चकित हो जाइयेगा। मन लगे तब तो और भी जल्दी होगा, नहीं लगने पर भी सब उपायों की अपेक्षा, इस से अत्यन्त शीघ्र बात हो जायगी।
(२)-- कोई महापुरुष सच्चा संत हो और उससे हृदय से प्रार्थना की जाए, अथवा भगवान के सामने हृदय से रोवें--'नाथ! मेरे मन में आपके अस्तित्व पर अखण्ड अटूट विश्वास हो जाय' ,तो एक क्षण में मन की वृति ऐसी आस्तिक बन जाएगी कि हमारे पास रहने वाले भी आस्तिक बनने लग जायँ।
असल में उत्कट इच्छा से प्रार्थना ही नहीं होती। नहीं तो यह बिल्कुल ठीक है, कि और प्रार्थना की सुनाई में देर भी हो, किंतु यह प्रार्थना तो भगवान या सन्त अवश्य--अवश्य सुन लेते हैं। अतएव हम प्रार्थना करते चलें।
*परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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