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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

              *६५*

*मन में प्रिया-प्रियतम को बसा लीजिये*

             बात तो केवल एक ही है 'जैसे हो, जिस साधन से हो बस, मन में प्रिया-प्रियतम को बसा लें--मन प्रिया-प्रियतम में लीन हो जाय। उनके अतिरिक्त मन में और कुछ रहे ही नहीं।' सचमुच यदि यह हो गया तो सब कुछ हो गया और यदि नहीं हुआ तो कुछ नहीं हुआ। एक भक्तके इस पद पर ध्यान देना चाहिए---

बृंदाबन बसि यह सुख लीजै।
सात समय की महल टहल बिनु इक छिन जान न दीजै।।
परम प्रेस की रासि रसिक जे तिन ही कौ सँग कीजै।
निबिड निकुंज बिहार चारु अति सुरस सुधा दिन पीजै।
और भजन-साधन में मिथ्या कबहूँ  कान न छीजै।
दिन दुलराइ-लड़इ दुहुन कों अलबेली अलि जीजै।।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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