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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*सच्ची इच्छा जाग्रत कीजिये,काम हो जायगा*
प्रिया-प्रियतम में हार्दिक प्रेम कैसे हो, उनके दर्शन की उत्कण्ठा कैसे उत्पन्न हो ? इन प्रश्नों का उत्तर कोई क्या दे। सच्ची बात यह है कि ये बातें सर्वथा श्रीकृष्ण की कृपा से ही होती हैं। यह ठीक है कि उनकी अपार, असीम कृपा प्रत्येक जीव पर निरन्तर बरस रही है ; पर जीव उनकी और उनकी कृपा की ओर न ताककर दूसरी ओर ताकता है उनकी कृपा के बदले दूसरी वस्तु चाहता है। इसीलिये वह कृपा प्रकट नहीं होती और उपर्युक्त बात मनुष्य के जीवनमें प्रत्यक्ष नहीं होती। अतः सबके लिये सर्वोत्तम उपाय है सच्चे मन की चाह लेकर उनकी कृपा को ग्रहण करने लग जाना चाहिये, फिर अपने आप सभी बातें हो जायँगी। सच्ची चाह हुई कि काम हुआ। आप सोचकर देखें--ईमानदारी से मन-ही-मन विचार करके देखें-- आप जिन-जिन बातों के सम्बन्ध में संत-महात्माओं से पूछते हैं, उन-उनको क्या आप सच्चे हृदय से चाहते हैं ? नहीं चाहते। यदि चाहते होते तो सच मानिये आपको किसी से पूछने की आवश्यकता नहीं होती, वे भाव आपको प्राप्त हो जाते। ऐसा इसलिये होता है कि श्रीकृष्ण आपके हृदयमें ही अन्तर्यामी रूप से वर्तमान हैं तथा आपकी प्रत्येक शुद्ध सच्ची इच्छा को पूर्ण करने के लिये तैयार हैं। अत: सच्ची इच्छा जाग्रत करें। 'मेरे मन में वैराग्य कैसे हो, प्रिया-प्रियतम की दया का अनुभव किस उपाय से हो, उनके दर्शन की प्रबल उत्कण्ठा कैसे हो--इन बातों की सच्ची इच्छा जाग्रत करें बस काम हो जायगा।
*परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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