69

*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

         *६९*

*बस, तीन ही बातें*

जीवन का अनमोल समय जितना भी बच रहा है, सब-का-सब प्रियाप्रियतम के चरणों में समर्पित होकर ही बीते---यह उद्देश्य आप याद रक्खें। उद्देश्य यदि स्मरण रहा तो सम्भवतः जीवन के अन्तिम श्वास तक दया करके वे आपको अपने-आप स्वीकार कर लें। आपसे बस तीन बातें ही कहनी हैं--

(१) उनकी कृपा की आशा ।
(२) जीभसे नाम का निरन्तर अभ्यास।
(३) भागवत का पाठ ।

         ---इन्हें मत छोड़ियेगा फिर जीवन की धारा किसी दिन एकाएक एक क्षण में ही पलट जायगी।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

Comments

Popular posts from this blog

92

90

157