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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*बस, तीन ही बातें*
जीवन का अनमोल समय जितना भी बच रहा है, सब-का-सब प्रियाप्रियतम के चरणों में समर्पित होकर ही बीते---यह उद्देश्य आप याद रक्खें। उद्देश्य यदि स्मरण रहा तो सम्भवतः जीवन के अन्तिम श्वास तक दया करके वे आपको अपने-आप स्वीकार कर लें। आपसे बस तीन बातें ही कहनी हैं--
(१) उनकी कृपा की आशा ।
(२) जीभसे नाम का निरन्तर अभ्यास।
(३) भागवत का पाठ ।
---इन्हें मत छोड़ियेगा फिर जीवन की धारा किसी दिन एकाएक एक क्षण में ही पलट जायगी।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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