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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
   
              *७*

*जो परिस्थिति आवे, उसका हम स्वागत करें*

       हम यह अनुभव करने की चेष्ठा करें, सारी शक्ति लगाकर विश्वास करें कि जो भी परिस्थिति भगवान की ओर से हमारे सामने रखी जा रही है, उसके कण-कण में लौकिक-पारलौकिक हमारा मंगल-ही-मंगल भरा है। हमारे लिए जो अत्यन्त आवश्यक परिस्थिति है, भगवान के द्वारा उसी का निर्माण किया गया है। भगवान अपरिसीम करुणामय हैं। उन्हें ठीक पूरा पता है कि हमारे लिए कौन-कौन सी परिस्थिति होनी चाहिए और यह सोच समझकर ही सारी परिस्थितियों का निर्माण भगवान ने किया है। अबोध बच्चे को क्या चाहिए। इसका निर्णय ठीक-ठीक उसकी जननी ही करती है और तदनुरूप व्यवस्था भी करती है। इसलिए जो भी परिस्थिति आवे, उसका हम स्वागत करें। यही प्रत्येक परिस्थिति में भगवान के मंगलमय विधान को देखना है।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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