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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

           *७६*

*भगवान के यहाँ अवश्य सुनाई देती है*


सत्संग करने से मनुष्य को थोड़ी या बहुत अवश्य शान्ति मिलती है। श्रद्धा जिस दिन पूरी हो जायगी, उसी दिन भगवान की दया एवं भगवान--दोनों ही प्रत्यक्ष हो जायेंगे। दयामय से प्रार्थना करनी चाहिये---'प्रभो! मेरे अन्तःकरण में शुद्ध दया एवं प्रेम का संचार कीजिये।' वे अतिशय दयालु हैं। भक्त को कभी निराश नहीं करते। उनके यहाँ विलम्ब से या जल्दी अवश्य सुनाई होती है।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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