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*आस्तिकताकी आधार-शिलाएँ*
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*चेष्ठा रखिये--प्रति पाँच मिनट पर भगवच्चरणों की स्मृति हो ही जाय*
'.............'की मृत्यु का समाचर सुनकर बहुत विचार हुआ ; पर वस्तुतः यह तो एक दिन सभी के जीवनमें होना अनिवार्य है।अतएव इस घटना से हम सबको शिक्षा अवश्य लेनी चाहिये। वे शायद दो महीने पहले यह कल्पना भी नहीं करते होंगे कि 'मुझे इतनी शीघ्रतासे यहाँसे जाना है।' ऐसे ही क्या पता, हम लोगों में से कब किसको यहाँ से एकाएक चला पडे। अतः समान बाँधकर तैयार रहना चाहिये। उस यात्रामें एकमात्र सामान है--मनके संस्कार। बस, इतना ही सामान जायगा, बाकी सब यही रह जायगा। तथा संस्कारोंमें भी सर्वोत्तम संस्कार हैं--भगवद्भजन के भगवत्मरण के। इनको जिसने बटोरा वही चतुर है, वही पण्डित है, अन्यथा वह ठगा गया,
इसमें कोई संदेह नहीं। अतः इन बातोंपर विश्वास करके निरन्तर भगवच्चरणोंको याद रखनेका आपको दृढ़ नियम लेना चाहिये। निरन्तर न हो तो कम-से कम
प्रति पाँच मिनट पर तो स्मृति हो ही जाय। इस बातमें चेष्टा एवं तीव्रता लानेकी जरूरत, फिर सफलता मिलेगी ही।
*।।परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू।।*
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