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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*भगवान के सौहार्द पर विश्वास बढ़ाएँ*
किसी वस्तु के अभाव का अनुभव होने पर ही कामना उत्पन्न होती है। लोभ में और काम में इतना ही अन्तर है कि लोभ उस वस्तु की सत्ता का अनुभव कराता है और परिवर्धन की माँग करता है और कामना वस्तु के अभाव की अनुभूति कराती है और उसकी पूर्ति की अपेक्षा रखती है। यहाँ भी भगवान के अनन्त सौहार्द पर यदि हमारा सचमुच विश्वास हो जाय, तो हमारे मन में आएगा कि क्या भगवान के पास किसी वस्तु का अभाव है, जो भगवान हमें नहीं दे रहे हैं ? असल में जो वस्तु हमारे पास नहीं है, उसकी सचमुच--सचमुच ही हमें आवश्यकता नहीं है। इसीलिए भगवान ने हमें नहीं दी है । यहाँ की माँ भी--लौकिक ममता से पूरित माँ भी अपने शिशु के लिए आवश्यक वस्तु की व्यवस्था बिना माँगे करती है। अनन्त माताओं के हृदय का सम्पूर्ण स्नेह एकत्र कर देने पर भी भगवान के स्नेह-सागर की एक बूँद के बराबर भी नहीं होता। वे परम् पिता परमात्मा क्या हमें आवश्यक वस्तु नहीं देते ? सारांश यह है कि भगवान के सौहार्द पर विश्वास बढ़ावें तो स्पृहा-वासना, क्षीण-क्षीणतर होते-होते सब-की-सब सर्वथा विलुप्त हो जायँगी।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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