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*आस्तिकता की आधार- शिलाएँ*

             *८३*

*भगवान की कृपा से ही महापुरुषों की कृपा का अनुभव होता है*

          महापुरुषों की दया कितनी विशाल होती है, इसका पूर्ण अनुभव तो अन्त:करण पूर्णतया शुद्ध हो जाने पर ही होता है। ज्यों-ज्यों मनुष्य भगवान के राज्य में प्रवेश करता जाता है उसका अन्धकार दूर होता जाता है। सूर्य के पूर्णतया उदय होने पर ही प्रकाश में स्थित वस्तु साफ दीखती है। इसी प्रकार महापुरुष क्या तत्व है, यह बात भगवत्प्राप्ति होने के बाद ही मालूम होती है। अतएव महापुरुषों के प्रति जितनी भी श्रद्धा कर सकें, वह मेरी समझ में थोड़ी ही रहेगी।

           भजन अधिक-से-अधिक हो, इसका पूर्ण ध्यान रखेंगे। नहीं तो आज जो आपका अन्तःकरण ऐसा सुन्दर निर्णय दे रहा है---महापुरुषों की दया का अनुभव करता है, वह कल करना बन्द हो जा सकता है। भगवान् की कृपा से ही महापुरुषों की कृपा का अनुभव होता है। अतः भगवान की कृपा का अनुभव बढ़ते जाने के लिये निरन्तर भजन होना चाहिये। महत्कृपा अपने आप यथोचित समय पर प्रकाशित होती रहेगी।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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