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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है*
जिस दिन भगवान पर पूर्ण विश्वास हो जाता है, उस दिन कोई कर्तव्य शेष नहीं रह जाता। हम लोगों के अन्दर विश्वास की कमी है। इसलिये मन में तरह-तरह की बातें उठा करती हैं। अवश्य ही घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। जिन्होंने अपनी अहैतुकी दया से आपको इस ओर प्रवृत्त किया, वे ही आगे भी बढ़ाते जायेंगे। विश्वास रखिये---भगवान अपने नाममात्र के भक्तपर भी प्रेम की अनन्त धारा किसी-न-किसी दिन बरसा ही देते हैं। बाट देखते रहिये। आपके जीवन में भी ऐसी ही बात होगी क्योंकि आपनेे भगवान की शरण ली है फिर चाहे अपूर्ण भाव से ही शरण ली हो। उनकी शरणागतवत्सलता कितनी दिव्य है, इस बात की हम लोग कल्पना भी नहीं कर सकते। वह जागतिक मन की कल्पना के अतीत है, बस उनकी कृपा से ही उस शरणागतवत्सलता का दर्शन कर निहाल होने की आशा में जीवन काटते जाइये।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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