89
*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
*८९*
*भगवत्कृपाका पात्र कौन है--इसका पता नहीं लग सकता*
भगवान जिस तरह रखें, उसी तरह रहने में पूर्ण संतोष रखना चाहिए। इस प्रपञ्चिक जगत के हेर-फेर से इस बात का पता नहीं लग सकता कि भगवत्कृपा का पात्र कौन है। कोढ़ी, सबसे अपमानित, सबकी नज़रों से गिरा हुआ, लोगों की दृष्टि में ‘पापी' नाम से प्रसिद्ध, सबकी घृणा का पात्र, भूख से कराहता हुआ भी भगवत्कृपा का पात्र हो सकता है,फिर उसे कोई जाने चाहे नहीं। भगवत्कृपा को प्राप्त करने वाले संत लाल कपड़े में ही हों, यह बात नहीं है। उजले कपडे में छिपे हुए आज भी कितने संत भारत की भूमि को पवित्र कर रहे, जिसका हमें पता नहीं। बस, पूर्ण समर्पण की अपनी ओर से तैयारी करते रहें।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
Comments
Post a Comment