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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*
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*प्रत्येक विपत्ति में प्रभु के परम मंगलमय कर-कमलों का दर्शन, स्पर्श प्राप्त करें*
होठों पर स्मित और स्वर प्रभु के नाम की पुकार लिये हुए ही हमारी जीवनलीला समाप्त हो और जब तक व्यवहार-जगत में रहें, तब तक सम्पूर्ण साहस के साथ प्रसन्न-चित्त से प्रत्येक विपत्ति में प्रभु के मंगलमय कर-कमलों का दर्शन, स्पर्श प्राप्त करते हुए हँसते-हँसते उसको सिर चढ़ाते चले जायें। अनजान में भी प्रभु के प्रति विश्वास का ऊँचा-से-ऊँचा परमाणु भरते चले जाना भी कम नहीं है, पर जीवन के आदर्श के लिए क्षेत्र इतना विस्तृत है कि जिसकी सीमा आज तक किसी भी महात्मा ने नापी ही नहीं।
*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*
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