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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

               *९१*

*दुःख से भरी हुई परिस्थितियों का स्वागत कीजिये*

         घबराइये मत। जो हो रहा है, मंगल के लिये हो रहा है। एक बार भी अपने को प्रभु के ऊपर छोड़ देने पर भगवान् फिर उसे नहीं छोड़ते। चैतन्य महाप्रभु ने कहा है- ‘सेवक तो ऐसा हो कि मालिक को छोड़े नहीं और मालिक ऐसा हो कि सेवक के छोड़ देने पर उसकी शिखा पकड़कर उसे ले आये। आजकल के सेवक भगवान को बारंबार पकड़ते और छोड़ते हैं, पर भगवान का कायदा वही है। वे अपनी प्रतिज्ञा से तनिक भी नहीं हटते- *‘न मे भक्त: प्रणश्यति'।* खूब आनन्द से जीवन बिताइये। दुःख से भरी हुई परिस्थितियों को भगवान का विशेष पुरस्कार समझकर उनका स्वागत कीजिये।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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