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*आस्तिकता की आधार-शिलाएँ*

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*किसी भी परिस्थिति में घबराइये नहीं, अधिक-से-अधिक भजन कीजिये*

          जिस प्रकार अमावस्या के घने अन्धकार के पश्चात् ज्योत्स्नामयी शुक्लपक्ष की रात का श्रीगणेश होता है, वैसे ही कभी-कभी लीलामय भगवान अपनी पूर्ण कृपा से प्लावित करने से पहले भयानक, अत्यन्त असह्य रात्रि में अपने प्रिय भक्त को बिल्कुल अंधा-सा बना देते है। अवश्य ही मंगलमय का यह विधान भी, चाहे ऊपर से देखने में कितना भी भीषण क्यों न हो, मंगल से ओत-प्रोत रहता है। इसीलिये विश्वासी भक्त किसी भी परिस्थिति में चिन्तित न होकर अपने प्रियतम भगवान की प्रत्यक्ष दया का दर्शन करते हुए मुग्ध होते रहते हैं। जहाँ तक आपके जीवन के सम्बन्ध में सोचता हूँ तो यही मालूम पड़ता है कि दयामय भगवान् अब तक जितनी कृपालुता से आपके जीवन को उन्नत बनाते आये हैं, उसके स्मरणमात्र से ही आपको मुग्ध होते रहना चाहिये। मेरी यह दृढ़ धारणा है कि किसी-न-किसी दिन इसी जीवन में आप यह ठीक देख पायेंगे कि भगवान की कृपालुता गुप्तरूप से ही किस प्रकार आपके योगक्षेम का वहन करती आ रही है। सार-रूप में इतना ही समझिये कि किसी भी परिस्थिति में घबराइयेगा नहीं और मेरे इस कथन में कि भगवान् ने आप लोगों को अपनी ओर खींचा है और उनका खींचना सदा-सर्वदा सब ओर से पूर्ण होता है। इसमें प्रमाण की कमी भी दीखे तो भी जहाँ तक हो सके,विश्वास करने की चेष्टा कीजियेगा। 
           अन्तिम बात यह है कि भजन अधिक-से-अधिक कीजियेगा। जगत में सच्चे निस्वार्थ मित्र केवल भगवान् ही हैं। *****भगवान् के नाम को नहीं भूलें, फिर भगवान् सब कुछ कर देंगे।

*।। परम पूज्य श्रीराधाबाबा जू ।।*

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